बसे हो कुछ इस तरह…

sohni-mahiwal

बसे हो कुछ इस तरह ए सनम मुझमे तुम ,
दो जिस्म एक जान जैसे हो हम |
उदास होती आँखें तेरी ,
छलकते आंसू आँखों से मेरी |.

चोट लगती है तुमको ,
दर्द महसूस होता है मुझको |
परेशां होते गर किसी बात पर तुम,
बेचैनी सी होती है मुझको |
बसे कुछ इस तरह हो मुझमे तुम ए सनम |

दूरियां ज़रूर है दरमियान तेरे मेरे ,
ज़िन्दगी की है ये हकीकत भले |
तू हो सकता नहीं कभी मेरा,
ये भी खबर है मुझे |
फिर भी बसे हो कुछ इस तरह मुझमे तुम ए सनम ..

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